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सोमवार, 14 जनवरी 2013

Goa Folk Festival

                         गोवा लोक संस्कृति महोत्सव
                              Goa Folk Festival
                               (21 जनवरी,2013)
                             
                                     




























"संभव" और मल्टी-कल्चरल आर्ट सेंटर, कुरुक्षेत्र के तत्वावधान में आल्योजित "गोवा लोक संस्कृति महोत्सव" में आप सभी आमंत्रित हैं...आशा है आप सभी कार्यक्रम का प्रचार करेंगे और अपने मित्रों और परिवार के साथ   इस कार्यक्रम को सफल बनायेंगे....

स्थान: आर.के.एस.डी.कालेज
समय : शाम सुहानी ( समय जल्दी ही पक्का हो जायेगा)  

बुधवार, 26 सितंबर 2012

किस्सा भगत सिंह-(ऑडियो)-हरियाणवी-भाग चार (अंतिम)

प्रस्तुत है भगत सिंह के किस्से की अंतिम कड़ी.(भगत सिंह - जन्मदिन 27 सितम्बर पर विशेष) शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशान होगा.इन्कलाब जिंदाबाद. भगत सिंह ने मन्ने मिला दो तन का करदे ढेर इस कारण कुनबा सारा सौ सौ पड़े मुसीबत तेरी रजा में रजा

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

किस्सा भगत सिंह (ऑडियो) हरियाणवी-भाग दो

प्रस्तुत है भगत सिंह के हरियाणवी किस्से का अगला भाग ना मान्या धड़का यो देश हमारा हम तुम सारे एक वतन भगतसिंह की चिठ्ठी

बुधवार, 19 सितंबर 2012

हाल हाळी का

कात्तिक बदी अमावस थी और दिन था खास दीवाळी का 
-आँख्याँ कै माँह आँसू आ-गे घर देख्या जब हाळी का ॥

कितै बणैं थी खीर, कितै हलवे की खुशबू ऊठ रही 
-हाळी की बहू एक कूण मैं खड़ी बाजरा कूट रही ।

हाळी नै ली खाट बिछा, वा पैत्याँ कानी तैं टूट रही
-भर कै हुक्का बैठ गया वो, चिलम तळे तैं फूट रही ॥

चाकी धोरै जर लाग्या डंडूक पड़्या एक फाहळी का
-आँख्याँ कै माँह आँसू आ-गे घर देख्या जब हाळी का ॥

सारे पड़ौसी बाळकाँ खातिर खील-खेलणे ल्यावैं थे
-दो बाळक बैठे हाळी के उनकी ओड़ लखावैं थे ।

बची रात की जळी खीचड़ी घोळ सीत मैं खावैं थे
-मगन हुए दो कुत्ते बैठे साहमी कान हलावैं थे ॥

एक बखोरा तीन कटोरे, काम नहीं था थाळी का
-आंख्यां कै माँह आँसू आ-गे घर देख्या जब हाळी का ॥

दोनूँ बाळक खील-खेलणाँ का करकै विश्वास गये
-माँ धोरै बिल पेश करया, वे ले-कै पूरी आस गये ।

माँ बोली बाप के जी नै रोवो, जिसके जाए नास गए
-फिर माता की बाणी सुण वे झट बाबू कै पास गए ।

तुरत ऊठ-कै बाहर लिकड़ ग्या पति गौहाने आळी का
-आँख्याँ कै माँह आँसू आ-गे घर देख्या जब हाळी का ॥

ऊठ उड़े तैं बणिये कै गया, बिन दामाँ सौदा ना थ्याया
-भूखी हालत देख जाट की, हुक्का तक बी ना प्याया !

देख चढी करड़ाई सिर पै, दुखिया का मन घबराया
-छोड गाम नै चल्या गया वो, फेर बाहवड़ कै ना आया ।

कहै नरसिंह थारा बाग उजड़-ग्या भेद चल्या ना माळी का ।
आँख्याँ कै माँह आँसू आ-गे घर देख्या जब हाळी का ॥


(साथी विक्रम प्रताप द्वारा प्रेषित दिल को छू लेने वाली हरियाणवी कविता)

मंगलवार, 18 सितंबर 2012

किस्सा भगत सिंह (ऑडियो) -भाग एक

हरियाणा में रागिणी की समृद्ध परंपरा है. धार्मिक किस्सों के अतिरिक्त अनेक गायकों ने शहीदों,लोकनायकों और स्वतंत्रता संग्राम के किस्सों को भी लिखा-गाया है. भगत सिंह का किस्सा भी हरियाणवी जनमानस में काफी लोकप्रिय रहा है. इस माह सत्ताइस सितम्बर को शहीद भगत सिंह का जन्मदिन है. अपने श्रोताओं व पाठकों के लिए भगत सिंह का किस्सा किश्तों में प्रकाशित करेंगे. इस किस्से को गाया है मास्टर सतबीर सिंह जी ने. (सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स के प्ले बटन पर क्लिक करें, अगर आपका कनेक्शन स्लो है तो बफर होने में थोड़ा समय लग सकता है कृपया प्रतीक्षा करें) (1)रोवन आला आपै जाणे (2)जोड़े हाथ खड़ा (3)भगत सिंह आजादी की हाँ (4)कुछ तो मेरे मन में थी

सोमवार, 10 सितंबर 2012

पंजाबी लोक गीत-किकली कलीर दी

इस दौड़ते-भागते मिक्सिंग और फ्यूजन के दौर में हमारे परंपरागत लोकगीत कहीं लुप्त होते जा रहें है. कैथलनामा का प्रयास रहेगा कि हमारी मिट्टी से जुड़े और लोकजीवन से उपजे गीतों, कविताओं, मुहावरों, पहेलियों को समय-समय पर अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जाये. इस कड़ी में आज सबसे पहले प्रस्तुत है ताहिरा सैयद की आवाज में पंजाबी लोकगीत किकली कलीर दी...(सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक के प्ले बटन पर क्लिक करें, अगर आपका कनेक्शन स्लो है तो बफर होने में कुछ क्षण लग सकते हैं, प्रतीक्षा करें)