फरहत शहजाद की शायरी और मेहंदी साहब की मौसिकी दोनों के मिलन ने अदब और तहजीब को एक अलग ही ऊंचाई तक पहुंचाया .पेश है आपके लिए चाँद गज़लें...
तुम्हारे साथ भी तनहा हूँ....
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कैथलनामा 'सम्भव' द्वारा संचालित साँझा मंच है. कैथल को सन्दर्भ में रखकर स्थानीय एवं मौखिक इतिहास,सांझी संस्कृति और साहित्य पर व्यापक विमर्श का यह एक छोटा सा प्रयास है.साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कुछ सार्थक प्रयास भी कियें जाएँ.बुद्धिजीवियो,सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, मीडियाकर्मियों,विद्यार्थियों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है..ऐसी हमारी उम्मीद है.
26 सितम्बर को “संभव” के
कार्यकर्ताओं, समर्थकों और चाहने वालों ने भगत सिंह की पूरी विचार यात्रा और काम
करने के तरीकों में समय के साथ आये बदलावों पर बातचीत की . हमने जानने की कोशिश की
कि आखिर देश के प्रति मोहब्बत का वो कौन सा जज्बा था जिसने अट्ठारह- उन्नीस साल के
एक नौजवान को चुपचाप अपने पिता को एक ख़त लिख कर अपना घर – बार छोड़ देश के लिए कुर्बान
होने के लिए प्रेरित किया. “नौजवान भारत सभा” “हिन्दुस्तान रिपब्लिकन आर्मी” और “हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी” के गठन
और भगत सिंह के विचारों के क्रमशः साफ़ होते जाने, असेम्बली में बम फेंकने और फांसी
के लिए जिद करने के पीछे उनके तर्कों पर हमने चर्चा की. हमने पाया की देश, समाज,
राजनीति, भाषा, साम्प्रदायिकता, धर्म, साहित्य, नौजवानियत, मोहब्बत, रूमानियत और न
जाने क्या - क्या....शायद ही कोई ऐसा विषय हो जिस पर भगत सिंह ने सोचा और लिखा ना
हो. बातचीत में लोगो ने जोर दिया कि आज हर गाँव क्या बल्कि हर इंसान को भगत सिंह बनने
की ज़रुरत है क्योंकि आज भी वे समस्याएँ, शोषण और भेद- भाव मौजूद हैं जिन्हें भगत
सिंह ख़त्म करना चाहते थे. कार्यक्रम में भगत सिंह के कुछ लेख भी पढ़े गए और
आंगनवाडी यूनियन लीडर संतरों ने भगत सिंह पर एक रागिनी सुनायी.
सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का ख्वाब देखने वाली ममता सौदा, कैथल की बेटी हैं. कैथल, जहां पहाडियां तो दूर की बात है ऊंचाई के नाम पर कुछ पुराने टीले मौजूद हैं या फिर कुछ तलाई बाज़ार की ऊँची-नीची सड़क या थोड़ी ऊँचाई पर बसा पुराना कैथल शहर,एक ऐसा शहर जहां पर्वतारोहण का कोई इतिहास नहीं मौजूद है, ममता सौदा एक के बाद एक लगातार चोटियाँ फतह करती जा रहीं हैं. ममता ने 22 मई, 2012 को विश्व की सबसे ऊंची चोटी, माउन्ट एवेरेस्ट फतह कर अपने अभियान की शुरुआत की थी. उसके पहले वह कई और ऊँचाईयों को भी फतह कर चुकी थीं. 20 जून 2012 को अफ्रीका के किलिमंजारो चोटी को उन्होंने फतह किया. इसी माह, एक सितम्बर को रूस की सबसे ऊंची चोटी माउन्ट एल्ब्रस पर उन्होंने झंडा फहराया. अपने शहर में लौटने पर ममता का ज़ोरदार स्वागत किया गया.*